तीन पत्ती शब्दावली
तीन पत्ती की टेबल पर सुनाई देने वाला हर शब्द — पहले एक लाइन में परिभाषा, फिर पूरी समझ।
58 शब्द परिभाषित · समीक्षा TeenPattiPlay संपादकीय टीम · अपडेट
तीन पत्ती की अपनी शब्दावली है, और उसका ज़्यादातर हिस्सा हिंदी के वे शब्द हैं जिनका टेबल पर कभी अनुवाद नहीं होता। बूट वह अनिवार्य रक़म है जो कार्ड बँटने से पहले हर खिलाड़ी डालता है। चाल वह दांव है जो कार्ड देख लेने के बाद लगाया जाए। ब्लाइंड यानी बिना देखे दांव, आधी रक़म पर। साइड-शो यानी अपने से पहले वाले खिलाड़ी से चुपचाप कार्ड की तुलना। ट्रेल यानी एक ही रैंक के तीन कार्ड — सबसे मज़बूत हाथ। नीचे हर शब्द वैसे ही समझाया गया है जैसे खिलाड़ी उसे बरतते हैं।
दांव और टेबल एक्शन
- बूट इसे यह भी कहते हैं: एंटी, बूट अमाउंट
-
हर खिलाड़ी द्वारा कार्ड बंटने से पहले पॉट में डाली जाने वाली अनिवार्य न्यूनतम रकम।
बूट हाथ शुरू होने से पहले तय होता है और यही पॉट की शुरुआती रकम बनाता है। आगे के ज़्यादातर दांव इसी के अनुपात में लगते हैं, इसलिए बूट ही तय करता है कि टेबल कितनी बड़ी है — बड़ा बूट यानी बड़ा उतार-चढ़ाव। टेबल पर आमतौर पर बूट और अधिकतम दांव दोनों लिखे होते हैं, ताकि खिलाड़ी अपनी सुविधा के हिसाब से टेबल चुन सकें।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- ब्लाइंड इसे यह भी कहते हैं: अंधा, ब्लाइंड चाल
-
बिना अपने कार्ड देखे लगाया गया दांव, जो उसी स्तर पर सीन खिलाड़ी के दांव से आधा होता है।
जिस खिलाड़ी ने अपने तीन कार्ड नहीं देखे, उसे ब्लाइंड कहते हैं और वह तब तक ब्लाइंड रहता है जब तक खुद कार्ड न देख ले। ब्लाइंड दांव सस्ता पड़ता है — मौजूदा स्टेक जितना, उसका दोगुना नहीं — इसलिए कई खिलाड़ी शुरुआती राउंड ब्लाइंड खेलकर हाथ की लागत कम रखते हैं। नुकसान यह है कि आप बिना जानकारी के पैसा लगा रहे होते हैं।
कहाँ इस्तेमाल होता है: ब्लाइंड तीन पत्ती · क्लासिक तीन पत्ती ·
- सीन इसे यह भी कहते हैं: सीन खिलाड़ी, चाल खिलाड़ी, देखा हुआ
-
वह खिलाड़ी जिसने अपने तीन कार्ड देख लिए हैं और इसलिए उसे मौजूदा स्टेक का कम से कम दोगुना दांव लगाना पड़ता है।
एक बार कार्ड देख लेने के बाद आप पूरे हाथ के लिए सीन हो जाते हैं और दोबारा ब्लाइंड नहीं बन सकते। सीन खिलाड़ी को ब्लाइंड खिलाड़ी से दोगुना देना होता है — यही जानकारी के साथ खेलने की कीमत है। साइड-शो सिर्फ़ सीन खिलाड़ी ही मांग सकता है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- चाल
-
सीन खिलाड़ी द्वारा हाथ में बने रहने के लिए लगाया जाने वाला दांव, जो आमतौर पर मौजूदा स्टेक का दो से चार गुना होता है।
चाल का मतलब है अपनी बारी पर पैक करने के बजाय पॉट में नया पैसा डालना। ज़्यादातर नियमों में सीन खिलाड़ी की चाल कम से कम मौजूदा स्टेक की दोगुनी और ज़्यादा से ज़्यादा चौगुनी होती है, और वह जितना डालता है उसी से अगले खिलाड़ियों के लिए स्टेक तय हो जाता है। ब्लाइंड खिलाड़ी के दांव को चाल नहीं, ब्लाइंड कहा जाता है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- पैक इसे यह भी कहते हैं: फ़ोल्ड, ड्रॉप
-
अपना हाथ छोड़कर मौजूदा राउंड से बाहर हो जाना, जिसमें पॉट में पहले लगाया गया पैसा गंवाना पड़ता है।
पैक करने पर सिर्फ़ पहले से लगाया हुआ पैसा जाता है, इससे ज़्यादा नुकसान नहीं होता — इसलिए कमज़ोर हाथ से निकलने का यही सबसे सस्ता रास्ता है। अनुशासित खिलाड़ी जल्दी और बार-बार पैक करते हैं, क्योंकि खराब हाथ के पीछे भागते रहना ही अधिकांश बैंकरोल खत्म करता है। पैक करने के बाद आप अगली डील तक खेल में हिस्सा नहीं लेते।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- शो इसे यह भी कहते हैं: शोडाउन
-
अंतिम चरण, जो सिर्फ़ दो खिलाड़ी बचने पर मांगा जा सकता है, जिसमें दोनों हाथ खोले जाते हैं और बड़ा हाथ पॉट जीतता है।
शो तभी मांगा जा सकता है जब टेबल पर सिर्फ़ दो खिलाड़ी बचे हों, और उसकी कीमत मांगने वाला चुकाता है — दोनों ब्लाइंड हों तो मौजूदा स्टेक, कोई सीन हो तो दोगुना। इसके बाद दोनों हाथ खोलकर सामान्य रैंकिंग से तुलना की जाती है। ज़्यादातर घरेलू नियमों में अगर दोनों हाथ बराबर हों तो शो मांगने वाला खिलाड़ी हार जाता है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- साइड-शो इसे यह भी कहते हैं: कंप्रोमाइज़
-
दो सीन खिलाड़ियों के बीच निजी तुलना, जिसमें कमज़ोर हाथ वाले को पैक करना पड़ता है और बाकी टेबल किसी का हाथ नहीं देखती।
चाल चुकाने के बाद कोई सीन खिलाड़ी अपने ठीक पहले वाले सीन खिलाड़ी से साइड-शो मांग सकता है, और वह खिलाड़ी इसे मान भी सकता है और मना भी कर सकता है। मान लेने पर दोनों हाथ आपस में चुपचाप देखे जाते हैं, हारने वाला पैक करता है और जीतने वाला बिना किसी और को कार्ड दिखाए खेलता रहता है। यह प्रतिद्वंद्वी को सस्ते में बाहर करने का तरीका है, पर इससे उसे यह भी पता चल जाता है कि आपका हाथ कितना मज़बूत था।
कहाँ इस्तेमाल होता है: साइड शो तीन पत्ती क्लासिक तीन पत्ती ·
- पॉट इसे यह भी कहते हैं: पोट, दांव की रकम
-
एक हाथ में सभी खिलाड़ियों द्वारा लगाई गई कुल रकम या चिप्स, जो विजेता को मिलती है।
पॉट बूट से शुरू होता है और हाथ के दौरान हर चाल और ब्लाइंड दांव से बढ़ता जाता है। यह या तो शो में जीता जाता है या तब, जब बाकी सभी खिलाड़ी पैक कर देते हैं। पॉट का आकार जानना ज़रूरी है, क्योंकि उसी से पता चलता है कि अगला दांव लगाने की कीमत के मुक़ाबले आप कितना जीत सकते हैं।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- पॉट लिमिट
-
एक नियम जो पॉट की अधिकतम रकम तय कर देता है, और वह सीमा छूते ही बचे हुए खिलाड़ियों के बीच तुरंत शो करा दिया जाता है।
पॉट लिमिट घरेलू खेल और ऐप्स में आम है, क्योंकि इससे एक ही हाथ में सबका पैसा नहीं फंसता। जैसे ही पॉट तय सीमा तक पहुंचता है, दांव रुक जाता है और बचे हुए खिलाड़ी सीधे अपने कार्ड दिखा देते हैं। यह सीमा आमतौर पर बूट के गुणक में तय की जाती है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- स्टेक इसे यह भी कहते हैं: मौजूदा दांव
-
टेबल पर चल रहा मौजूदा दांव स्तर, जिसके आधार पर ब्लाइंड और सीन खिलाड़ी की रकम तय होती है।
हाथ की शुरुआत में स्टेक बूट के बराबर होता है। हर दांव के बाद यह अपडेट होता है: ब्लाइंड खिलाड़ी का दांव सीधे नया स्टेक बन जाता है, जबकि सीन खिलाड़ी के दांव का आधा हिस्सा स्टेक बनता है, क्योंकि सीन खिलाड़ी हमेशा दोगुना देता है। आगे के सभी दांव इसी आंकड़े से नापे जाते हैं।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- रेज़ इसे यह भी कहते हैं: दांव बढ़ाना
-
अपनी स्थिति के लिए तय न्यूनतम से ज़्यादा दांव लगाकर मौजूदा स्टेक को बढ़ा देना।
रेज़ करने से बाद में खेलने वाले खिलाड़ियों पर दबाव पड़ता है, क्योंकि अब उन्हें बड़ी रकम देनी होगी या पैक करना होगा। तीन पत्ती में रेज़ की सीमा होती है — सीन खिलाड़ी आमतौर पर स्टेक का दो से चार गुना ही लगा सकता है, इसलिए बढ़ोतरी असीमित नहीं होती। खिलाड़ी रेज़ मज़बूत हाथ से पॉट बढ़ाने और कमज़ोर हाथ से दूसरों को हटाने, दोनों के लिए करते हैं।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती · टेक्सास होल्डम पोकर ·
- कॉल इसे यह भी कहते हैं: दांव बराबर करना
-
स्टेक बढ़ाए बिना, हाथ में बने रहने के लिए ठीक उतनी ही रकम लगाना जितनी ज़रूरी है।
कॉल करने से आप सबसे कम कीमत पर राउंड में बने रहते हैं और अगले खिलाड़ी के लिए स्टेक वही रहता है। तीन पत्ती में यह न्यूनतम चाल है — ब्लाइंड हैं तो स्टेक जितना, सीन हैं तो उसका दोगुना। ठीक-ठाक पर बहुत मज़बूत नहीं हाथ के साथ यही स्वाभाविक विकल्प है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती · टेक्सास होल्डम पोकर ·
- बेट लिमिट इसे यह भी कहते हैं: टेबल लिमिट, न्यूनतम/अधिकतम दांव
-
किसी टेबल पर एक दांव में लगाई जा सकने वाली न्यूनतम और अधिकतम रकम।
हर टेबल की बेट लिमिट तय होती है, और तीन पत्ती में अधिकतम चाल आमतौर पर मौजूदा स्टेक के चार गुने तक सीमित रहती है। कैसीनो और ऐप की टेबल पर एक कुल टेबल लिमिट भी होती है, जो तय करती है कि एक दांव कितना बड़ा हो सकता है। अपनी जेब के हिसाब से लिमिट वाली टेबल चुनना पैसे के प्रबंधन का सबसे आसान तरीका है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती · अंदर बाहर ·
- ऑल-इन
-
अपने बचे हुए सारे चिप्स मौजूदा हाथ पर लगा देना।
ऑल-इन जाने वाला खिलाड़ी उस हाथ में दोबारा दांव नहीं लगा सकता और पॉट का सिर्फ़ उतना ही हिस्सा जीत सकता है जितना उसने बराबर किया है; बाकी रकम दूसरों के लिए साइड पॉट बन जाती है। यह पोकर का शब्द है जो तीन पत्ती ऐप्स में भी चलन में आ गया है, जहां चिप्स खत्म होते ही अक्सर अपने-आप शो हो जाता है। यह बहुत उतार-चढ़ाव वाला कदम है — इससे रकम दोगुनी भी हो सकती है और सेशन खत्म भी।
कहाँ इस्तेमाल होता है: टेक्सास होल्डम पोकर · क्लासिक तीन पत्ती ·
हैंड और रैंकिंग
- ट्रेल इसे यह भी कहते हैं: ट्रायो, सेट, तीन एक जैसे, तीन का सेट
-
एक ही रैंक के तीन कार्ड, जैसे तीन इक्के, जो मानक तीन पत्ती का सबसे बड़ा हाथ है।
22,100 संभावित तीन-कार्ड हाथों में से 52 ट्रेल बनते हैं, यानी लगभग 0.24 प्रतिशत संभावना। तीन इक्के सबसे बड़ा ट्रेल है और तीन दुक्की सबसे छोटा। दिलचस्प बात यह है कि ट्रेल प्योर सीक्वेंस से थोड़ा ज़्यादा बनता है (52 बनाम 48 संयोजन), फिर भी परंपरागत रैंकिंग में ट्रेल ही सबसे ऊपर रखा जाता है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- प्योर सीक्वेंस इसे यह भी कहते हैं: पक्की रन, स्ट्रेट फ्लश
-
एक ही सूट के तीन लगातार कार्ड, जो मानक तीन पत्ती में ट्रेल के बाद दूसरा सबसे बड़ा हाथ है।
22,100 संभावित हाथों में से सिर्फ़ 48 प्योर सीक्वेंस होते हैं, यानी लगभग 0.22 प्रतिशत — गणित के हिसाब से यह खेल का सबसे दुर्लभ हाथ है, फिर भी रैंकिंग में यह ट्रेल से नीचे आता है। एक ही सूट का A-K-Q सबसे बड़ा प्योर सीक्वेंस है और 4-3-2 सबसे छोटा, और ज़्यादातर नियमों में A-2-3 को A-K-Q के ठीक नीचे रखा जाता है। यह क्रम संभावना से नहीं, परंपरा से तय हुआ है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- सीक्वेंस इसे यह भी कहते हैं: रन, सीधी
-
तीन लगातार कार्ड जो एक ही सूट के नहीं हैं, जो प्योर सीक्वेंस से नीचे और रंग से ऊपर आता है।
22,100 में से 720 हाथ ऐसे बनते हैं, यानी करीब 3.26 प्रतिशत संभावना। इक्का लचीला होता है: A-K-Q सबसे बड़ा रन है और 4-3-2 सबसे छोटा, जबकि A-2-3 को आमतौर पर दूसरा सबसे बड़ा माना जाता है। तीन पत्ती में मिले-जुले सूट का रन रंग से बड़ा होता है, जो पोकर खेलने वालों की उम्मीद के उलट है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- रंग इसे यह भी कहते हैं: कलर, फ्लश
-
एक ही सूट के तीन कार्ड जो लगातार क्रम में नहीं हैं, जिनकी तुलना सबसे बड़े कार्ड से होती है और जिसे कोई भी रन हरा देता है।
22,100 संभावित हाथों में से 1,096 रंग होते हैं, यानी लगभग 4.96 प्रतिशत। दो रंगों की तुलना पहले सबसे बड़े कार्ड से होती है, ज़रूरत पड़ने पर दूसरे और तीसरे कार्ड से। ध्यान रहे कि यहां रंग का मतलब सूट है, लाल-काले वाला रंग नहीं।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- जोड़ी इसे यह भी कहते हैं: पेयर, जोड़ा
-
एक ही रैंक के दो कार्ड और एक अलग कार्ड, जो हाई कार्ड से ऊपर और रंग से नीचे आता है।
22,100 हाथों में से 3,744 में जोड़ी बनती है, यानी करीब 16.94 प्रतिशत — इसलिए यह तीन पत्ती का सबसे आम बना-बनाया हाथ है। जोड़ियों की तुलना पहले रैंक से होती है, इक्कों की जोड़ी सबसे बड़ी है, और दोनों की जोड़ी एक जैसी हो तभी तीसरा कार्ड यानी किकर फ़ैसला करता है। जोड़ी इतनी आम होने की वजह से छोटी जोड़ी उतनी सुरक्षित नहीं होती जितना नए खिलाड़ी समझते हैं।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- हाई कार्ड इसे यह भी कहते हैं: बिना जोड़ी
-
ऐसा हाथ जिसमें ट्रेल, सीक्वेंस, रंग या जोड़ी कुछ नहीं है और जिसका फ़ैसला सिर्फ़ सबसे बड़े कार्ड से होता है।
हाई कार्ड सबसे आम नतीजा है: 22,100 में से 16,440 हाथ, यानी करीब 74.39 प्रतिशत। बराबरी होने पर दूसरे और फिर तीसरे कार्ड की तुलना की जाती है। चूंकि चार में से तीन खिलाड़ियों के पास आमतौर पर इससे बेहतर कुछ नहीं होता, इसलिए इक्का-बादशाह जैसा बड़ा हाई कार्ड भी खेलने लायक होता है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- किकर इसे यह भी कहते हैं: साइड कार्ड
-
वह बचा हुआ कार्ड जो दो खिलाड़ियों के एक जैसे हाथ होने पर विजेता तय करता है।
अगर दोनों खिलाड़ियों के पास नहलों की जोड़ी है, तो हर हाथ का तीसरा कार्ड किकर होता है और बड़ा किकर जीतता है। हाई कार्ड की बराबरी भी किकर से तय होती है, जहां बारी-बारी से दूसरे और तीसरे कार्ड की तुलना होती है। किकर को नज़रअंदाज़ करना नए खिलाड़ियों की आम गलती है, क्योंकि अक्सर यही कार्ड चुपचाप पॉट हरवा देता है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती · टेक्सास होल्डम पोकर ·
- हैंड रैंकिंग इसे यह भी कहते हैं: हाथों का क्रम
-
हाथों की तुलना के लिए तय क्रम, जो मानक तीन पत्ती में ट्रेल, प्योर सीक्वेंस, सीक्वेंस, रंग, जोड़ी और हाई कार्ड है।
यह क्रम दुर्लभता से पूरी तरह मेल नहीं खाता — प्योर सीक्वेंस थोड़ा ज़्यादा दुर्लभ होने के बावजूद ट्रेल से हार जाता है — इसलिए इसे याद ही करना पड़ता है। कुछ वैरिएंट इसे जान-बूझकर बदल देते हैं: मुफ़लिस में सबसे कमज़ोर हाथ जीतता है, और जोकर वाले खेलों में संभव हाथ ही बदल जाते हैं। खेलने से पहले हमेशा जांच लें कि टेबल पर कौन-सी रैंकिंग चल रही है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती · मुफ़लिस तीन पत्ती ·
- शोडाउन
-
वह क्षण जब बचे हुए खिलाड़ी अपने कार्ड खोलते हैं और हैंड रैंकिंग से पॉट का विजेता तय होता है।
तीन पत्ती में शोडाउन तब होता है जब दो खिलाड़ी बचने पर शो की रकम चुकाई जाती है, या जब पॉट लिमिट पूरी हो जाती है। हाथ में बचे सभी खिलाड़ी अपने कार्ड खोल देते हैं और बिना और दांव लगाए रैंकिंग लागू की जाती है। अगर एक को छोड़ बाकी सब पैक कर चुके हों तो शोडाउन होता ही नहीं — आख़िरी बचा खिलाड़ी पॉट ले जाता है और उसे अपने कार्ड दिखाने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
खेल और टेबल शब्द
- डीलर इसे यह भी कहते हैं: बांटने वाला
-
वह खिलाड़ी या हाउस प्रतिनिधि जो एक हाथ के लिए कार्ड फेंटता और बांटता है।
घरेलू खेल में डीलर की भूमिका हर हाथ के बाद बदलती रहती है, ताकि किसी एक खिलाड़ी को लंबे समय तक स्थिति का फ़ायदा न मिले। कैसीनो और लाइव ऐप गेम में हाउस डीलर टेबल चलाता है और उसका खेल के नतीजे में कोई दांव नहीं होता। ऑनलाइन खेल में कार्ड इंसान नहीं, सॉफ़्टवेयर बांटता है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती · ब्लैकजैक ·
- डील इसे यह भी कहते हैं: कार्ड बांटना
-
हाथ की शुरुआत में कार्ड बांटने की प्रक्रिया, जिसमें तीन पत्ती में हर खिलाड़ी को तीन कार्ड नीचे मुंह करके दिए जाते हैं।
कार्ड एक-एक करके और उल्टे मुंह बांटे जाते हैं, इसलिए जब तक कोई खुद न देखे, उसे अपने कार्ड का पता नहीं होता। भारतीय परंपरा में कार्ड टेबल पर वामावर्त यानी एंटी-क्लॉकवाइज़ दिशा में बांटे जाते हैं। डील तभी शुरू होती है जब सभी खिलाड़ी बूट डाल चुके हों।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- डेक इसे यह भी कहते हैं: ताश की गड्डी
-
चार सूट वाली मानक 52 कार्ड की गड्डी, जिससे तीन पत्ती खेली जाती है और जोकर वैरिएंट को छोड़कर जोकर नहीं मिलाए जाते।
52 कार्ड से ठीक 22,100 संभावित तीन-कार्ड हाथ बनते हैं, और तीन पत्ती की सारी संभावनाएं इसी से निकलती हैं। सामान्य खेल में इक्का सबसे बड़ा होता है, और A-2-3 रन में छोटे कार्ड की तरह भी काम कर सकता है। जोकर तीन पत्ती जैसे वैरिएंट में छपे हुए जोकर जोड़े जाते हैं या कोई कार्ड वाइल्ड घोषित होता है, जिससे पूरा गणित बदल जाता है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती · जोकर तीन पत्ती ·
- कट इसे यह भी कहते हैं: पत्ते काटना
-
डील से पहले फेंटी हुई गड्डी को काटना, जो आमतौर पर डीलर के बाएं खिलाड़ी करता है ताकि गड्डी जमाई न जा सके।
कट रणनीति नहीं, ईमानदारी का तरीका है — इससे डीलर के लिए कार्डों का क्रम तय करना बहुत मुश्किल हो जाता है। असली टेबल पर कट को गंभीरता से लिया जाता है और काटने का हक़ डील के साथ बारी-बारी घूमता है। ऑनलाइन खेल में काटने को कुछ होता ही नहीं, क्योंकि क्रम रैंडम नंबर जनरेटर तय करता है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- एंटी-क्लॉकवाइज़ डीलिंग इसे यह भी कहते हैं: वामावर्त बांटना, उल्टी दिशा में बांटना
-
कार्ड बांटने और बारी लेने की भारतीय परंपरा, जिसमें खेल डीलर के दाईं ओर बढ़ता है, बाईं ओर नहीं।
ज़्यादातर पारंपरिक भारतीय ताश खेलों की तरह तीन पत्ती भी वामावर्त चलती है: पहला कार्ड डीलर के दाएं बैठे खिलाड़ी को जाता है और खेल उसी दिशा में आगे बढ़ता है। पोकर और ब्लैकजैक जैसे पश्चिमी खेल घड़ी की दिशा में चलते हैं, इसीलिए पोकर खेलने वालों को ऑनलाइन तीन पत्ती टेबल कभी-कभी उल्टी लगती है। दिशा से संभावनाओं पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, सिर्फ़ बारी का क्रम बदलता है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- टेबल
-
एक अलग गेम, जिसकी अपनी सीटें, अपना बूट और अपनी बेटिंग लिमिट होती है और जिसमें तीन से दस खिलाड़ी तक बैठ सकते हैं।
तीन पत्ती तीन से छह खिलाड़ियों के साथ आराम से चलती है, हालांकि ऐप्स पर अक्सर इससे ज़्यादा लोग बैठते हैं। हर टेबल पर बूट, अधिकतम दांव और पॉट लिमिट लिखी होती है, और यही आंकड़े तय करते हैं कि खेल कितना महंगा पड़ेगा। टेबलें आमतौर पर स्टेक के हिसाब से बंटी होती हैं, ताकि नए खिलाड़ी और बड़े दांव वाले एक साथ न बैठें।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- राउंड इसे यह भी कहते हैं: बेटिंग राउंड, दौर
-
दांव का एक पूरा चक्र, जिसमें बचा हुआ हर खिलाड़ी एक बार अपनी बारी खेलता है।
तीन पत्ती का एक हाथ उतने राउंड तक चलता है जितने खिलाड़ी दांव लगाते रहना चाहें, और अक्सर हर चक्र के साथ स्टेक बढ़ता जाता है। हाथ तब खत्म होता है जब शो मांगा जाए, पॉट लिमिट पूरी हो जाए, या एक को छोड़ बाकी सब पैक कर दें। कितने राउंड बीत चुके हैं, यह गिनना यह समझने का अच्छा तरीका है कि सामने वाले कितने गंभीर हैं।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- चिप इसे यह भी कहते हैं: टोकन, सिक्का
-
टेबल पर दांव की इकाई दर्शाने वाला टोकन, चाहे वह असली गोल चिप हो या ऐप में दिखने वाला डिजिटल बैलेंस।
चिप्स से हिसाब आसान रहता है और ऐप्स में यह गेम की करेंसी को खिलाड़ी के वॉलेट से अलग रखती हैं। कई तीन पत्ती ऐप पूरी तरह मुफ़्त या प्रैक्टिस चिप्स पर चलते हैं, जिन्हें वापस पैसे में नहीं बदला जा सकता। खेलने से पहले हमेशा देख लें कि वहां एक चिप का असल में मतलब क्या है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- ब्लफ़ इसे यह भी कहते हैं: धोखा, झांसा
-
कमज़ोर हाथ के साथ दांव या रेज़ करना ताकि सामने वाले आपको मज़बूत समझकर पैक कर दें।
ब्लफ़ तभी काम करता है जब सामने वाले पैक कर दें, इसलिए यह सतर्क खिलाड़ियों और कम लोगों वाली टेबल पर सबसे कारगर है, और शो देखने पर अड़े खिलाड़ी के सामने बुरी तरह पिट जाता है। ब्लाइंड खेल तीन पत्ती को ब्लफ़ के लिए ख़ास मुफ़ीद बनाता है, क्योंकि ब्लाइंड खिलाड़ी के पास क्या है यह किसी को — कभी-कभी ख़ुद उसे भी — नहीं पता होता। ब्लफ़ करना खेल के कौशल का सामान्य हिस्सा है, कोई तिकड़म या जीत की गारंटी नहीं, और बार-बार ब्लफ़ करने वाले जल्दी पकड़े जाकर पिटते हैं।
कहाँ इस्तेमाल होता है: ब्लफ · क्लासिक तीन पत्ती ·
- टेल इसे यह भी कहते हैं: इशारा, आदत
-
कोई अनजाने में हुई आदत या प्रतिक्रिया, जिससे खिलाड़ी के हाथ की मज़बूती का संकेत मिल जाता है।
बड़े दांव से पहले हिचकना, तुरंत दांव लगा देना या चिप्स संभालने के तरीके में बदलाव — ये जाने-पहचाने टेल हैं। ऑनलाइन ये बहुत कमज़ोर पड़ जाते हैं, फिर भी दांव लगाने की रफ़्तार और रकम का आकार काफ़ी कुछ बता देते हैं। टेल को कई हाथों की आदत के तौर पर पढ़ा जाता है, एक इशारे से पक्का नतीजा निकालने के लिए नहीं।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती · टेक्सास होल्डम पोकर ·
- पोज़िशन इसे यह भी कहते हैं: स्थिति, बैठने की जगह
-
डीलर के मुक़ाबले खिलाड़ी के बैठने की जगह, जो तय करती है कि अपनी बारी आने तक उसके पास कितनी जानकारी होगी।
बाद में खेलना फ़ायदेमंद है, क्योंकि तब तक आप बाकी सबको दांव लगाते या पैक करते देख चुके होते हैं। तीन पत्ती में पोज़िशन साइड-शो भी तय करती है, क्योंकि खिलाड़ी सिर्फ़ अपने ठीक पहले वाले सीन खिलाड़ी से ही साइड-शो मांग सकता है। चूंकि डील वामावर्त होती है, इसलिए देर वाली पोज़िशन का मतलब है डीलर के बाईं ओर बैठना।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती · टेक्सास होल्डम पोकर ·
- टाइट और लूज़ खेल इसे यह भी कहते हैं: टाइट खिलाड़ी, लूज़ खिलाड़ी
-
इस बात का वर्णन कि खिलाड़ी कितने हाथ खेलता है — टाइट खिलाड़ी कम हाथ खेलता है, लूज़ खिलाड़ी बहुत सारे।
टाइट खिलाड़ी औसत हाथ जल्दी पैक कर देता है और ज़्यादातर मज़बूत कार्डों पर ही पैसा लगाता है, जिससे नुकसान कम रहता है पर उसे पढ़ना आसान हो जाता है। लूज़ खिलाड़ी लगभग हर पॉट में उतरता है, जिससे उसका हाथ छिपा रहता है पर कमज़ोर कार्डों पर चिप्स बहते रहते हैं। कोई एक शैली अपने-आप में सही या गलत नहीं; असली बात यह पहचानना है कि कौन-सा खिलाड़ी कौन-सी शैली अपना रहा है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- आक्रामक और निष्क्रिय खेल इसे यह भी कहते हैं: एग्रेसिव खेल, पैसिव खेल
-
इस बात का वर्णन कि हाथ में उतरने के बाद खिलाड़ी कैसे दांव लगाता है — आक्रामक खिलाड़ी बार-बार रेज़ करता है, निष्क्रिय खिलाड़ी सिर्फ़ कॉल करना पसंद करता है।
आक्रामक खेल पॉट बड़ा करता है और जीतने का दूसरा रास्ता भी देता है, क्योंकि सामने वाले दांव झेलने के बजाय पैक कर सकते हैं। निष्क्रिय खेल सिर्फ़ कॉल करता रहता है और शो में ही जीत सकता है, यानी वह अतिरिक्त मौका गंवा देता है। टाइट-लूज़ के साथ मिलकर ये शब्द खिलाड़ियों के वे चार जाने-पहचाने प्रकार बनाते हैं जिनसे पूरी टेबल का अंदाज़ा लगाया जाता है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
वैरिएंट और मोड
- मुफ़लिस इसे यह भी कहते हैं: लोबॉल तीन पत्ती, ग़रीब
-
तीन पत्ती का ऐसा वैरिएंट जिसमें रैंकिंग उलट जाती है और सबसे कमज़ोर हाथ पॉट जीतता है।
मुफ़लिस में 5-3-2 जैसा हाई कार्ड सबसे मज़बूत हाथ बन जाता है और इक्कों का ट्रेल लगभग बेकार हो जाता है। हाथों का क्रम बस उल्टा कर दिया जाता है, जिससे मंजे हुए खिलाड़ियों को अपनी आदतें भुलानी पड़ती हैं और दांव लगाने का तरीका भी बिल्कुल बदल जाता है। इसका नाम उर्दू शब्द 'मुफ़लिस' यानी कंगाल से आया है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: मुफ़लिस तीन पत्ती ·
- जोकर इसे यह भी कहते हैं: वाइल्ड कार्ड, वाइल्ड
-
गड्डी में जोड़ा गया या घोषित किया गया ऐसा कार्ड, जो हाथ पूरा करने के लिए किसी भी दूसरे कार्ड की जगह ले सकता है।
जोकर या तो गड्डी में छपे हुए कार्ड होते हैं या डील से पहले किसी रैंक को वाइल्ड घोषित कर दिया जाता है, जैसे सारे दुक्के। वाइल्ड कार्ड से मज़बूत हाथ बनना बहुत आसान हो जाता है, इसलिए ट्रेल और प्योर सीक्वेंस दुर्लभ नहीं रहते और सामान्य संभावनाएं लागू नहीं होतीं। नियमों में यह हमेशा साफ़ होना चाहिए कि कितने जोकर चल रहे हैं और एक हाथ में उनका इस्तेमाल एक से ज़्यादा बार हो सकता है या नहीं।
कहाँ इस्तेमाल होता है: जोकर तीन पत्ती ·
- AK47 इसे यह भी कहते हैं: AK47 तीन पत्ती
-
तीन पत्ती का ऐसा वैरिएंट जिसमें सभी इक्के, बादशाह, चौके और सत्ते जोकर की तरह काम करते हैं।
नाम इन्हीं चार रैंकों से बना है: A, K, 4 और 7। गड्डी में सोलह वाइल्ड कार्ड होने से मज़बूत हाथ लगातार बनते रहते हैं और सिर्फ़ जोड़ी से जीतना मुश्किल हो जाता है। कुछ टेबल पर सख़्त रूप भी चलता है जिसमें इन चार में से सिर्फ़ एक रैंक वाइल्ड होती है, इसलिए दांव लगाने से पहले नियम ज़रूर पूछ लें।
कहाँ इस्तेमाल होता है: AK47 तीन पत्ती ·
- बेस्ट-ऑफ़-फ़ोर इसे यह भी कहते हैं: बेस्ट ऑफ़ 4, चार कार्ड
-
तीन पत्ती का ऐसा वैरिएंट जिसमें हर खिलाड़ी को चार कार्ड मिलते हैं और उन्हीं में से सबसे मज़बूत तीन-कार्ड हाथ बनाना होता है।
एक अतिरिक्त कार्ड मिलने से हाथ बनाने के चार मौके मिलते हैं, इसलिए क्लासिक खेल के मुक़ाबले बने-बनाए हाथ ज़्यादा दिखते हैं और जीतने वाले हाथ औसतन मज़बूत होते हैं। आख़िरी तीन कार्डों पर सामान्य रैंकिंग ही लागू होती है और बचा हुआ कार्ड छोड़ दिया जाता है। दांव क्लासिक तीन पत्ती की तरह ही लगते हैं।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- 999 इसे यह भी कहते हैं: नाइन-नाइन-नाइन, 9-9-9
-
तीन पत्ती का ऐसा वैरिएंट जिसमें सामान्य रैंकिंग हटा दी जाती है और पॉट उस हाथ को मिलता है जिसका मान 999 के सबसे क़रीब हो।
हर कार्ड को एक अंक की तरह पढ़ा जाता है, इसलिए तीन नहले सबसे अच्छा हाथ है और बाकी हाथों की तुलना इसी से नज़दीकी के आधार पर होती है। ट्रेल और सीक्वेंस वाली सामान्य रैंकिंग का यहां कोई रोल नहीं, इसलिए नए खिलाड़ियों के लिए हिसाब लगाना आसान रहता है। तस्वीर वाले कार्ड कैसे गिने जाएंगे, यह हर जगह अलग होता है — इसलिए डील से पहले नियम तय कर लें।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- हुकुम इसे यह भी कहते हैं: हुक्म, तुरुप
-
किसी हाथ के लिए घोषित वह सूट या कार्ड, जो बाकी सबसे ऊपर माना जाता है।
हुकुम का शाब्दिक अर्थ है आदेश, और यह विचार भारतीय ताश खेलों में गहरे तक बसा है: कोर्ट पीस में हुकुम वाला सूट हर दूसरे सूट को हरा देता है, और तीन पत्ती के कुछ घरेलू वैरिएंट में घोषित हुकुम कार्ड वाइल्ड या टाई-ब्रेकर की तरह काम करता है। नियम जगह-जगह अलग होते हैं, इसलिए हुकुम की ताक़त खेल शुरू होने से पहले तय कर लेनी चाहिए। यह इस बात की साफ़ मिसाल है कि भारतीय ताश खेल एक-दूसरे से नियम कैसे उधार लेते हैं।
कहाँ इस्तेमाल होता है: कोर्ट पीस · क्लासिक तीन पत्ती ·
- लोबॉल इसे यह भी कहते हैं: उल्टी रैंकिंग वाला खेल
-
ऐसा कोई भी खेल या वैरिएंट जिसमें सबसे बड़े नहीं, बल्कि सबसे छोटे हाथ की जीत होती है।
लोबॉल पूरे परिवार का नाम है; मुफ़लिस तीन पत्ती में इसी का रूप है, और यही विचार कई पोकर वैरिएंट में भी मिलता है। कार्ड बांटने और दांव लगाने के नियम वही रहते हैं — सिर्फ़ शोडाउन में तुलना उल्टी हो जाती है। लोबॉल में वही खिलाड़ी अच्छा करते हैं जो बड़े कार्ड देखकर ललचाने की आदत छोड़ पाते हैं।
कहाँ इस्तेमाल होता है: मुफ़लिस तीन पत्ती ·
- साइड-शो मोड इसे यह भी कहते हैं: साइड-शो तीन पत्ती
-
तीन पत्ती का ऐसा प्रारूप जो साइड-शो के इर्द-गिर्द बना है, जहां ज़्यादातर खिलाड़ी निजी तुलना से ही बाहर होते हैं।
नियम क्लासिक तीन पत्ती वाले ही हैं, पर टेबल इस तरह बनी होती है कि लंबे दांव-युद्ध के बजाय साइड-शो ज़्यादा हों, जिससे हाथ जल्दी खत्म होते हैं। इसमें वही खिलाड़ी फ़ायदे में रहते हैं जो याद रखते हैं कि किसने कार्ड देखे हैं और कौन तुलना के लिए तैयार होगा। साइड-शो से मना करना हमेशा जायज़ है, और वह इनकार भी अपने-आप में एक संकेत होता है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: साइड शो तीन पत्ती
- ब्लाइंड मोड इसे यह भी कहते हैं: ब्लाइंड तीन पत्ती
-
तीन पत्ती का ऐसा प्रारूप जिसमें खिलाड़ी बिना कार्ड देखे दांव लगाते हैं, चाहे अपनी मर्ज़ी से या टेबल के नियम के कारण।
ब्लाइंड दांव सीन खिलाड़ी के दांव से आधा पड़ता है, इसलिए ब्लाइंड खेलने से हाथ सस्ता रहता है और सामने वाले को पढ़ना बहुत मुश्किल हो जाता है। कुछ ऐप टेबल पर शुद्ध ब्लाइंड प्रारूप चलता है, जहां शो तक कोई कार्ड नहीं देख सकता और खेल लगभग पूरी तरह दांव की जंग बन जाता है। यह बहुत उतार-चढ़ाव वाला तरीका है, क्योंकि आप बिना देखे कार्डों पर पैसा लगा रहे होते हैं।
कहाँ इस्तेमाल होता है: ब्लाइंड तीन पत्ती ·
- प्राइवेट टेबल इसे यह भी कहते हैं: प्राइवेट रूम, दोस्तों की टेबल
-
ऐसी टेबल जिसमें सिर्फ़ बुलाए गए खिलाड़ी शामिल हो सकते हैं, आमतौर पर दोस्तों के बीच बांटे गए कोड से।
प्राइवेट टेबल पर कोई भी ग्रुप अपना बूट, अपनी लिमिट और अपना पसंदीदा वैरिएंट तय कर सकता है और अनजान लोगों को बाहर रख सकता है। ये त्योहारों पर ख़ास लोकप्रिय हैं, जब दिवाली की महफ़िलों में परिवार तीन पत्ती खेलते हैं। ज़्यादातर ऐप्स में रूम बनाने वाला ही वैरिएंट और चिप का प्रकार चुनता है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
पैसा, ऐप और ऑड्स
- RTP इसे यह भी कहते हैं: रिटर्न टू प्लेयर
-
किसी गेम पर लगाई गई कुल रकम का वह प्रतिशत, जिसे वह गेम बहुत बड़ी संख्या में राउंड पर खिलाड़ियों को लौटाने के लिए बनाया गया है।
96 प्रतिशत RTP का मतलब है कि लाखों राउंड में हर 100 रुपये के दांव पर गेम औसतन लगभग 96 लौटाता है। यह गेम के डिज़ाइन में बंधा लंबी अवधि का औसत है, किसी एक सेशन का वादा नहीं — छोटे दौर में नतीजा इससे बहुत ऊपर या बहुत नीचे जा सकता है। स्लॉट और क्रैश गेम में RTP बताया जाता है, और यह हाउस एज का ही उल्टा रूप है।
- हाउस एज इसे यह भी कहते हैं: घर का फ़ायदा
-
किसी गेम में ऑपरेटर को मिलने वाला गणितीय फ़ायदा, जो हर दांव के उस प्रतिशत के रूप में बताया जाता है जिसे वह लंबे समय में अपने पास रखता है।
हाउस एज और RTP एक ही बात कहने के दो तरीके हैं: 96 प्रतिशत RTP का मतलब है 4 प्रतिशत हाउस एज। यही फ़ायदा समय के साथ ऑपरेटर को मुनाफ़ा देता है, और कोई भी बेटिंग सिस्टम इसे मिटा नहीं सकता। तीन पत्ती जैसे खिलाड़ी-बनाम-खिलाड़ी खेलों में ऑपरेटर दांव पर एज लेने के बजाय कमीशन या टेबल फ़ीस लेता है।
- संभावना इसे यह भी कहते हैं: प्रोबेबिलिटी
-
किसी नतीजे के होने की गुंजाइश, जिसे सभी संभावित नतीजों के प्रतिशत या अंश के रूप में बताया जाता है।
तीन पत्ती की हर संभावना 22,100 संभावित तीन-कार्ड हाथों से निकलती है: ट्रेल 52 (0.24 प्रतिशत), प्योर सीक्वेंस 48 (0.22 प्रतिशत), सीक्वेंस 720 (3.26 प्रतिशत), रंग 1,096 (4.96 प्रतिशत), जोड़ी 3,744 (16.94 प्रतिशत) और बाकी 16,440 हाथ हाई कार्ड (74.39 प्रतिशत)। ये आंकड़े गड्डी के बारे में बताते हैं, आपकी क़िस्मत के बारे में नहीं, और पिछले हाथ में क्या हुआ था इससे ये नहीं बदलते। इन्हें जानना ही सोच-समझकर पैक करने और उम्मीद के भरोसे कॉल करने का फ़र्क़ है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- ऑड्स इसे यह भी कहते हैं: संभावना का अनुपात, भुगतान दर
-
किसी नतीजे के न होने और होने के तरीकों का अनुपात, या किसी दांव पर मिलने वाला भुगतान।
यह शब्द दो अर्थों में चलता है: असली ऑड्स बताते हैं कि कोई चीज़ कितनी संभावित है, जबकि दांव पर दिए गए ऑड्स बताते हैं कि जीतने पर कितना मिलेगा। तीन पत्ती में ट्रेल 22,100 हाथों में से 52 बार बनता है, यानी लगभग 424 के मुक़ाबले 1। जिस भी गेम में भुगतान के ऑड्स असली ऑड्स से कम होते हैं, वहां हाउस एज होता है — और इसी फ़र्क़ में ऑपरेटर का मुनाफ़ा छिपा रहता है।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती · रूलेट ·
- वैरिएंस इसे यह भी कहते हैं: उतार-चढ़ाव, वोलैटिलिटी
-
नतीजों का अपेक्षित औसत के आसपास स्वाभाविक बिखराव, जिसकी वजह से छोटे दौर के नतीजे गणित से बहुत अलग हो सकते हैं।
ज़्यादा वैरिएंस वाले गेम में जीत कभी-कभी आती है पर बड़ी होती है, और बीच में लंबे समय तक हार चलती है; कम वैरिएंस वाले गेम छोटी रकम बार-बार देते हैं। वैरिएंस ही समझाता है कि सही फ़ैसलों के बावजूद रात भर हार क्यों हो सकती है और गलत फ़ैसलों के बावजूद जीत क्यों — इसीलिए एक सेशन से किसी रणनीति के बारे में कुछ साबित नहीं होता। ज़्यादा खेलने से यह ख़त्म नहीं होता, नतीजे बस अपेक्षित औसत के क़रीब आ जाते हैं, और हाउस एज वाले गेम में वह औसत नुकसान ही होता है।
- बैंकरोल इसे यह भी कहते हैं: खेल के लिए अलग रखी रकम
-
खेलने के लिए अलग रखी गई रकम, जो बाकी ज़रूरतों के पैसे से पूरी तरह अलग रखी जाती है।
बैंकरोल मैनेजमेंट का मतलब है यह रकम पहले से तय करना, ऐसी टेबल चुनना जिसका बूट उसका छोटा-सा हिस्सा हो, और रकम खत्म होने पर और पैसे डालने के बजाय रुक जाना। मक़सद यह है कि उतार-चढ़ाव झेला जा सके और नुकसान उस पैसे तक न पहुंचे जिसे आप गंवा नहीं सकते। बैंकरोल हमेशा मनोरंजन के ख़र्च जितना ही रखें, यह मानकर कि वह वापस नहीं आएगा।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- फ्री चिप्स इसे यह भी कहते हैं: प्रैक्टिस चिप्स, मुफ़्त चिप्स
-
ऐप द्वारा प्रैक्टिस के लिए दी गई वर्चुअल चिप्स, जिनकी कोई नक़द क़ीमत नहीं होती और जिन्हें निकाला नहीं जा सकता।
ज़्यादातर तीन पत्ती ऐप रोज़ाना कुछ फ्री चिप्स देते हैं, ताकि खिलाड़ी बिना ख़र्च के नियम और वैरिएंट सीख सकें। चूंकि यहां असली कुछ दांव पर नहीं होता, इसलिए फ्री चिप्स वाले गेम में लोग असली पैसे के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा लापरवाही से खेलते हैं और यह अनुभव असली टेबल की सही तस्वीर नहीं देता। फ्री चिप्स अक्सर ऐप के भीतर ख़रीदी भी जा सकती हैं — वह ख़रीदारी है, दांव नहीं।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- APK इसे यह भी कहते हैं: एंड्रॉयड पैकेज
-
एंड्रॉयड की वह इंस्टॉलर फ़ाइल, जिससे ऐप गूगल प्ले स्टोर के बाहर बांटे जाते हैं।
कई भारतीय कार्ड गेम ऐप APK के रूप में बंटते हैं, क्योंकि प्ले स्टोर की नीति असली पैसे वाले गेमिंग ऐप पर रोक लगाती है। APK इंस्टॉल करने का मतलब है स्टोर की जांच को दरकिनार करना, इसलिए फ़ाइल कहां से आई यह बेहद अहम है — बदली हुई या दोबारा पैक की गई APK मैलवेयर और अकाउंट चोरी का आम ज़रिया हैं। APK हमेशा सिर्फ़ डेवलपर की अपनी आधिकारिक साइट से ही इंस्टॉल करें।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- असली पैसा बनाम प्रैक्टिस खेल इसे यह भी कहते हैं: कैश गेम बनाम फ्री गेम
-
उन खेलों का अंतर जिनमें निकाली जा सकने वाली असली रकम दांव पर लगती है और उन खेलों का जो सिर्फ़ बिना नक़द क़ीमत वाली वर्चुअल चिप्स से खेले जाते हैं।
प्रैक्टिस खेल नियम, हैंड रैंकिंग और वैरिएंट सीखने के लिए है, जहां कुछ भी दांव पर नहीं होता — हर नए खिलाड़ी को यहीं से शुरू करना चाहिए। असली पैसे वाले खेल के साथ क़ानूनी, आर्थिक और उम्र से जुड़ी शर्तें जुड़ती हैं, जो भारत में राज्य-दर-राज्य अलग हैं और कई राज्यों में इस पर रोक या पाबंदी है। यह साइट सिर्फ़ जानकारी देती है — न कोई गेम चलाती है, न कोई दांव लेती है; कुछ भी लगाने से पहले अपने राज्य का क़ानून ज़रूर देखें।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती ·
- ज़िम्मेदार गेमिंग इसे यह भी कहते हैं: सुरक्षित खेल, ज़िम्मेदारी से खेलना
-
समय और पैसे की तय सीमा में खेलने की आदत, जिसमें दांव को कमाई नहीं बल्कि मनोरंजन का ख़र्च माना जाता है।
व्यवहार में इसका मतलब है — शुरू करने से पहले नुकसान की सीमा तय करना, हारी हुई रकम वापस पाने के पीछे न भागना, उधार के पैसे से कभी न खेलना, और भरोसेमंद ऐप्स में मिलने वाले डिपॉज़िट लिमिट, रिमाइंडर और सेल्फ़-एक्सक्लूज़न जैसे टूल इस्तेमाल करना। हाउस एज वाला हर गेम इस तरह बना है कि समय के साथ पैसा हारा ही जाए, इसलिए कोई भी कौशल इसे कमाई का भरोसेमंद ज़रिया नहीं बना सकता। अगर खेलना आपके बस में न रह जाए, तो भारत में मदद मौजूद है — किरण मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन: 1800-599-0019।
- RNG इसे यह भी कहते हैं: रैंडम नंबर जनरेटर
-
वह सॉफ़्टवेयर जो हर डिजिटल शफ़ल, स्पिन या क्रैश मल्टीप्लायर के पीछे अप्रत्याशित नतीजे तय करता है।
ऑनलाइन कार्ड गेम में गड्डी का क्रम RNG तय करता है, यानी वह असली फेंटने और काटने की जगह ले लेता है। भरोसेमंद ऑपरेटर अपने RNG की जांच eCOGRA, GLI या iTech Labs जैसी स्वतंत्र प्रयोगशालाओं से कराते हैं और उसका प्रमाणपत्र सार्वजनिक करते हैं। RNG की कोई याददाश्त नहीं होती, इसलिए लगातार खराब हाथ आने के बाद अगली डील में अच्छा हाथ आने की संभावना नहीं बढ़ती।
कहाँ इस्तेमाल होता है: क्लासिक तीन पत्ती · स्लॉट्स ·
- प्रूवेबली फ़ेयर इसे यह भी कहते हैं: साबित की जा सकने वाली निष्पक्षता
-
एक क्रिप्टोग्राफ़िक तरीका, जिससे खिलाड़ी ख़ुद जांच सकता है कि राउंड का नतीजा उसके दांव लगाने से पहले तय था और बाद में बदला नहीं गया।
ऑपरेटर राउंड से पहले सर्वर सीड का हैश प्रकाशित करता है, खिलाड़ी अपनी क्लाइंट सीड जोड़ता है, और दोनों से नतीजा बनता है — जिसे सीड सामने आने के बाद कोई भी दोबारा जांच सकता है। यह एविएटर जैसे क्रैश और डाइस गेम में आम है और साबित करता है कि राउंड से छेड़छाड़ नहीं हुई — यह हाउस एज नहीं हटाता और न ही जीतने की संभावना बढ़ाता है। प्रूवेबली फ़ेयर पारदर्शिता का तरीका है, कोई रणनीति नहीं।